जननी/janani
जन्म देने वाली स्त्री जननी के रूप में पूजी जाती है । परंतु जिसकी पूजा हो उसका अनादर नहीं किया जाता!फिर क्यों उस जननी, माता ,स्त्री, जग चालक, मां का अनादर अपमान होता आया है?
हर स्त्री चाहे आपकी मां, बहन ,अर्धांगिनी या कोई सखी ,सब अपने में ममता की मूरत लेकर जन्म लेती है। क्या किसी एक दिन, या नो दिन पूजना काफी है ?ऐसी देवी को जो धूप-छांव,दिन-प्रतिदिन, सुबह-शाम समर्पण की भावना से निस्वार्थ सेवा करती है।
दरअसल मेरे ख्याल में मां पूजनीय है इसीलिए प्रतिदिन ही हमें उसको याद रखना चाहिए, शायद उसी की दुआओं का असर है हम इस संसार में निडर जीवन यापन कर रहे हैं। स्त्री किसी ना किसी रूप में हमारी रक्षा करने के उद्देश्य से जन्म लेती है परंतु क्या हम उसकी रक्षा करने में समर्थ है? विचार करिए? स्त्री की दुर्दशा पौराणिक काल से होती आ रही है। शायद उसका ही प्रतिरूप आज के समाज में दिखता है। तभी तो ना मा की इज्जत होती है, ना बहन की ,और तो और बेटी की, हर दिन अभद्र भाषा का प्रयोग कर हम अपनी जननी, उस शक्ति का अपमान करते हैं जिसने इस संसार को राह दिखाई इसको पूर्ण किया।
ऐसी कितनी ही घर है जहां मां दिन रात लगी रहती है ।उसका बचपन पिता की छाया में बीता, यौवन पती की सेवा में और बुढ़ापा पुत्र के कंधों पर । फिर भी अपनी ख्वाहिशों को मार जी रही है इतने बलिदान करके भी वह अहंकार नहीं करती।
अंत में यही कहना चाहूंगी सभी स्त्री जननी यानी जन्म देने वाली होती है इसलिए सभी को मां समझ के आदर देना योग्य कार्य है । और जिस संस्कृति में हम पले बढ़े हैं वहां तो धरती को भी माता का रूप दिया है , इसी नियत से हर स्त्री का आदर करें।